अध्याय 1 श्लोक 46
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Monday, 4 February 2013
अध्याय 1 श्लोक 1 - 46 , BG 1 - 46 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 1 - 45 , BG 1 - 45 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 45
यदि शस्त्रधारी धृतराष्ट्र के पुत्र मुझ निहत्थे तथा रणभूमि में प्रतिरोध न करने वाले को मारें, तो यह मेरे लिए श्रेयस्कर होगा ।
Saturday, 2 February 2013
अध्याय 1 श्लोक 1 - 44 , BG 1 - 44 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 44
ओह! कितने आश्चर्य की बात है कि हम सब जघन्य पापकर्म करने के लिए उद्यत हो रहे हैं | राज्यसुख भोगने कि इच्छा से प्रेरित होकर हम अपने सम्बन्धियों को मारने पर तुले हैं |
अध्याय 1 श्लोक 1 - 43 , BG 1 - 43 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 43
हे प्रजापालक कृष्ण! मैनें गुरु-परम्परा से सुना है कि जो लोग कुल-धर्म का विनाश करते हैं, वे सदैव नरक में वास करते हैं |
Thursday, 31 January 2013
अध्याय 1 श्लोक 1 - 42 , BG 1 - 42 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 42
जो लोग कुल-परम्परा को विनष्ट करते हैं और इस तरह अवांछित सन्तानों को जन्म देते हैं उनके दुष्कर्मों से समस्त प्रकार की सामुदायिक योजनाएँ तथा पारिवारिक कल्याण-कार्य विनष्ट हो जाते हैं |
Wednesday, 30 January 2013
अध्याय 1 श्लोक 1 - 41 , BG 1 - 41 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 41
अवांछित सन्तानों की वृद्धि से निश्चय ही परिवार के लिए तथा पारिवारिक परम्परा को विनष्ट करने वालों के लिए नारकीय जीवन उत्पन्न होता है | ऐसे पतित कुलों के पुरखे (पितर लोग) गिर जाते हैं क्योंकि उन्हें जल तथा पिण्ड दान देने की क्रियाएँ समाप्त हो जाती हैं |
Tuesday, 29 January 2013
अध्याय 1 श्लोक 1 - 40 , BG 1 - 40 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 40
हे कृष्ण! जब कुल में अधर्म प्रमुख हो जाता है तो कुल की स्त्रियाँ दूषित हो जाती हैं और स्त्रीत्व के पतन से हे वृष्णिवंशी! अवांछित सन्तानें उत्पन्न होती हैं |
Monday, 28 January 2013
अध्याय 1 श्लोक 1 - 39 , BG 1 - 39 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 39
कुल का नाश होने पर सनातन कुल-परम्परा नष्ट हो जाती है और इस तरह शेष कुल भी अधर्म में प्रवृत्त हो जाता है |
Sunday, 27 January 2013
अध्याय 1 श्लोक 1 - 37 , 38 , BG 1 - 37 , 38 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 37 - 38
हे जनार्दन! यद्यपि लोभ से अभिभूत चित्त वाले ये लोग अपने परिवार को मारने या अपने मित्रों से द्रोह करने में कोई दोष नहीं देखते किन्तु हम लोग, जो परिवार के विनष्ट करने में अपराध देख सकते हैं, ऐसे पापकर्मों में क्यों प्रवृत्त हों?
Saturday, 26 January 2013
अध्याय 1 श्लोक 1 - 36 , BG 1 - 36 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 36
यदि
हम ऐसे आततायियों का वध करते हैं तो हम पर पाप चढ़ेगा, अतः यह उचित नहीं
होगा कि हम धृतराष्ट्र के पुत्रों तथा उनके मित्रों का वध करें | हे
लक्ष्मीपति कृष्ण! इससे हमें क्या लाभ होगा? और अपने ही कुटुम्बियों को मार
कर हम किस प्रकार सुखी हो सकते हैं?
Friday, 25 January 2013
अध्याय 1 श्लोक 1 - 32 , 33 , 34 , 35 , BG 1 - 32 , 33 , 34 , 35 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 32 - 35
हे गोविन्द! हमें राज्य, सुख अथवा इस जीवन से क्या लाभ! क्योंकि जिन सारे लोगों के लिए हम उन्हें चाहते हैं वे ही इस युद्धभूमि में खड़े हैं |
Thursday, 24 January 2013
अध्याय 1 श्लोक 1 - 31, BG 1 - 31 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 31
हे कृष्ण! इस युद्ध में अपने ही स्वजनों का वध करने से न तो मुझे कोई अच्छाई दिखती है और न, मैं उससे किसी प्रकार कि विजय, राज्य या सुख की इच्छा रखता हूँ |
Tuesday, 22 January 2013
अध्याय 1 श्लोक 1 - 30, BG 1 - 30 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 30
मैं यहाँ अब और अधिक खड़ा रहने में असमर्थ हूँ | मैं अपने को भूल रहा हूँ और मेरा सिर चकरा रहा है | हे कृष्ण! मुझे तो केवल अमंगल के कारण दिख रहे हैं |
अध्याय 1 श्लोक 1 - 29, BG 1 - 29 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 29
मेरा सारा शरीर काँप रहा है, मेरे रोंगटे खड़े हो रहे हैं, मेरा गाण्डीव धनुष मेरे हाथ से सरक रहा है और मेरी त्वचा जल रही है |
Monday, 21 January 2013
अध्याय 1 श्लोक 1 - 28, BG 1 - 28 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 28
अर्जुन ने कहा – हे कृष्ण! इस प्रकार युद्ध कि इच्छा रखने वाले मित्रों तथा सम्बन्धियों को अपने समक्ष उपस्थित देखकर मेरे शरीर के अंग काँप रहे हैं और मेरा मुँह सूखा जा रहा है |
अध्याय 1 श्लोक 1 - 27, BG 1 - 27 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 27
जब कुन्तीपुत्र अर्जुन ने मित्रों तथा सम्बन्धियों की इन विभिन्न श्रेणियों को देखा तो वह करुणा से अभिभूत हो गया और इस प्रकार बोला |
अध्याय 1 श्लोक 1 - 26, BG 1 - 26 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 26
अर्जुन ने वहाँ पर दोनों पक्षों की सेनाओं के मध्य में अपने चाचा-ताउओं, पितामहों, गुरुओं, मामाओं, भाइयों, पुत्रों, पौत्रों, मित्रों, ससुरों और शुभचिन्तकों को भी देखा |
Saturday, 19 January 2013
अध्याय 1 श्लोक 1 - 25, BG 1 - 25 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 25
भीष्म, द्रोण तथा विश्र्व भर के अन्य समस्त राजाओं के सामने भगवान् ने कहा कि हे पार्थ! यहाँ पर एकत्र सारे कुरुओं को देखो |
Friday, 18 January 2013
अध्याय 1 श्लोक 1 - 24, BG 1 - 24 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 24
संजय ने कहा - हे भरतवंशी! अर्जुन द्वारा इस प्रकार सम्बोधित किये जाने पर भगवान् कृष्ण ने दोनों दलों के बीच में उस उत्तम रथ को लाकर खड़ा कर दिया |
Wednesday, 16 January 2013
अध्याय 1 श्लोक 1 - 23 , BG 1 - 23 Bhagavad Gita As It Is Hindi
अध्याय 1 श्लोक 23
मुझे उन लोगों को देखने दीजिये जो यहाँ पर धृतराष्ट्र के दुर्बुद्धि पुत्र (दुर्योधन) को प्रसन्न करने की इच्छा से लड़ने के लिए आये हुए हैं |
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